तुम्हारी ऐम ऑब्जेक्ट है-- ज्योतिर्लिंगम बनना, बाप समान।

 *Most imp---*


*तुम्हारी ऐम ऑब्जेक्ट है-- ज्योतिर्लिंगम बनना, बाप समान। माना आत्मा ज्योति बन जाए, और शरीर में रोम-रोम में ज्ञान की रोशनी समा जाए। यह है-- लक्ष्मी नारायण का कम्बाइंड रूप*


*तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट क्या है? नर से नारायण और नारी से लक्ष्मी बनना-- यह है तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट*

 भक्ति मार्ग में कोई भी साधु संत महात्मा, ऐसे नहीं कहेंगे-- यह तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट है। वो जब सत्यनारायण की कथा सुनाने बैठते हैं, तब सामने ये चित्र रखते हैं। जैसे अभी तुम्हारे सामने ये चित्र रखते हैं।

 *भक्ति मार्ग में जड़ चित्रों को रखते हैं, और ज्ञान मार्ग में चैतन्य चित्र को।*

 *बाप कहते हैं ना फ़ालो फादर। किस को फॉलो करेंगे?? सारी सृष्टि का जो एक बाप है, उसकी पहचान तुमको देते हैं। तो चित्र तुम्हारे सामने है-- कि यह है तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट।*

         *बाप आकरके तुमको एम ऑब्जेक्ट का चित्र रख देते हैं लक्ष्मी नारायण का। तो लक्ष्मी नारायण दो हैं, या एक?? कोई कहेगा कि लक्ष्मीनारायण एक हैं।*

 एक कैसे?? चित्र में तो अलग-अलग पर्सनैलिटी दिखाई है। तो ये एम ऑब्जेक्ट का चित्र बाप तुम्हारे सामने रख देते हैं। *और इस चित्र के लिए बाप कितना समझाते हैं।ये नहीं कहा, इन चित्रों के लिए, इस चित्र,इस- माना एक हुआ।* भक्ति मार्ग वाले ब्रह्माकुमार कुमारिया तो लक्ष्मी नारायण का चित्र रख देते हैं।

 *तो बाप कहते हैं चाहे लक्ष्मी हो ,या नारायण दोनों का कंबाइंड रुप तो एक ही है। वह क्या है?* चित्र में तो अलग-अलग पर्सनैलिटी दिखाई है लेकिन , *जो चैतन्य है कंबाइंड रूप है, जिसके लिए बाप कितना समझाते हैं। 80 साल हो गए समझाते समझाते।*

         *चित्र माना, जिसका फोटो खींचा जाए। बाप कहते बच्चों को, कि बच्चे ये चित्र तो तुम्हारे पास घड़ी घड़ी रहना चाहिए। यहां बैज में भी यह चित्र है, अगर समझो तो।*।

 *पॉकेट में रखो तो घड़ी घड़ी देखो इस चित्र को। भक्ति मार्ग में स्थूल पॉकेट समझेंगे तुम्हारे बुद्धि में है बुद्धि रूपी पॉकेट ,कि हम यह बन रहे हैं।*

 *ये-- माना क्या आदमी बन रही है या औरत?? लक्ष्मी बन रहे हैं या नारायण??*

         *जो एक बताया वो है एवर लास्टिंग, ज्योतिर्लिंगम। यह बन रहे हैं माना ज्योति का लिंग दिखाया है। जिसकी जो भक्ति मार्ग में पूजा करते थे।*।   

     *माना जैसे यह ज्योतिर्लिंगम है, ऐसे हम भी. आत्मा ज्योति बन रही है ,और शरीर क्या बनेगा?? शरीर में रोम-रोम में ज्ञान की रोशनी समा जाएगी, तो हम भी बाप समान बनेंगे।*          *तो मन मनाभव का मतलब तो समझ गए ना? माना मेरे मन में समा जा। तुम्हारे जो सारे संकल्पों का घमासान है, वह सारे संकल्प एक शिव ज्योति बिंदु में समा जाएंगे। कौन सा शिव?? जड़ शिव? नहीं, उसी शरीर धारी में, जो शरीर धारी होते हुए भी शरीर की स्मृति से परे चला जाएगा।शरीर तो होगा। तो यही तुम्हारा एम ऑब्जेक्ट है। ऐसा ही बनना है।* 19-05-19













बाप ने लक्ष्य दिया नर से नारायण और नारी से लक्ष्मी बनने के लिए। वह लक्ष देने वाला कौन ?और किसको दिया? जिसको दिया वह 76 में अपने एम ऑब्जेक्ट पूरा कर लिया । वही सबसे पहला नर से नारायण और नारी से लक्ष्मी बनने वाली आत्मा है स्थूल रूप में। 76 में टू लेट का बोर्ड लग गया। इसके बाद कोई कैसे भी पुरुषार्थ करें वह कभी नर से नारायण और नारी से लक्ष्मी नहीं बन सकते । 

तो हम बच्चों का लक्ष्य क्या है? ज्योतिर्लिंगम बन्ना। ज्योतिर्लिंग हम भी एक स्टेज ऐसा है जिसमें लक्ष्मी नारायण का स्वरूप का कंबाइंड रूप कह सकते हैं अभी हम सभी बच्चों के लिए यह एम ऑब्जेक्ट ज्योतिर्लिंगम बनना ही है। जब तक वह 12 ज्योतिर्लिंग प्रत्यक्ष नहीं हो जाते। उसके बाद इसके लिए भी टू लेट का वोट लग जाएगा। 

तो फिर हमारे एम ऑब्जेक्ट क्या है?

 हमारे एम एग्जैक्ट मुरली में बोला है नर से नारायण नारी से लक्ष्मी बन्ना। पहले पहले हमको अपने परा प्रकृति और अप्राप्रकृति के अंदर बैलेंस बनाकर ज्योतिर्लिंग हम स्टेज धारण करना है ।वही लक्ष्मी नारायण का स्वरूप है । लेकिन अब्बल नंबर में नहीं। नंबर बार आत्माओं के लिए यह स्टेज नंबर बार होगी। ऐसा नहीं कि ज्योतिर्लिंग हम सिर्फ 12 ही बनता है। तो हमारा एम ऑब्जेक्ट ज्योतिर्लिंग बनना नहीं है। फिर तो उस एक के लिए 76 में टू लेट का बोर्ड जब लगा था तब तो हमारा एम ऑब्जेक्ट लक्ष्मीनारायण बन्ना तो कैंसिल होना चाहिए था। फिर भी लक्ष्मी नारायण का स्टेट को धारण करने वाला 4.5 लाखों का भी गायन है । और ज्योतिर्लिंगम स्टेज धारण करने वाला 108 आत्मा भी नंबर वार है । हां यह अलग बात 12 ही उनमें से बन पाते हैं, वह तो बाद की बात। अभी हमारे सामने हेम ऑब्जेक्ट है ज्योतिर्लिंगम बन्ना। और ज्योतिर्लिंगम बन्ना मना ही एक ही शरीर में लक्ष्मी नारायण का परा प्रकृति आर अपरा प्रकृति का मेल बनाए रखना।

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