त्रिमूर्ति में इशारा दीया-उस बाप का परिचय दो, किस बाप का?
*त्रिमूर्ति में इशारा दीया-उस बाप का परिचय दो, किस बाप का?*
जिसकी मंदिरों में पूजा होती है, वह कहता है- जिस बाप का परिचय देने के लिए, कौन कहता है? शिव बाप कहता है उस बाप का परिचय दो,जो बाप इस संसार मे पुरुषार्थ करके निराकारी स्टेज धारण कर लेता है, क्या? बाप समान बन जाता है, बाप का बड़ा बच्चा बन जाता है।
कैसा? निराकारी, निर्विकारी, निरंहकारी बन जाता है। सिर्फ कहने की बात या प्रैक्टिकल शरीर के साथ कर्म करने के आधार पर? हाँ? प्रैक्टिकल कर्म करने के आधार पर वह मंदिर में दिखाया गया है शिव के मंदिर में।
की वह प्रैक्टिकल कर्म भी कर रहा है।जो गीता में आदेश है- कर्मेन्द्रियों से कर्म करना है, क्या? बाबा ने कर्म छोड़ने के लिए कहा या कर्म करने के लिए कहा? करना है लेकिन कर्म करते हुए बाप को याद करना है? माना मन बुद्धि ना कर्मेन्द्रियों में लगे, ना कर्मेन्द्रियों की रस में लगे, ना कर्मेन्द्रियों के संग में लगे। कर्मेन्द्रियों की याद भी बुद्धि में ना रहे। किसकी याद करे? बाप की याद रहे। बिंदु की याद रहे। एक शिवबाबा दूसरा ना कोई। ऐसी स्टेज रहे।
तो ऐसी स्टेज धारण करने में जो अब्बल नंबर है, उसकी शिव के मंदिर में पूजा होती है शिवलिंग के रूप में।
*vcd 2303*
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