इस ज्ञान का मुख्य एग्जाम है नष्टो मोहा।
ईश्वर बाप के बच्चे बो जो बाप के धंधे का अनुकरण करे, पेट की धंधा न करे। कहेंगे छोटे छोटे बाल बच्चे है, उनकी परवरिश कौन करेगा??? कहेंगे न?? तो बाप कहते है जिस परिवार में छोटे छोटे बच्चे है, कारने अकारने बाप का शरीर छूट जाता है , तो बच्चे मर जाते है क्या??? संबंधी संभालते या नहीं संभालते?? और संबंधियों के बुद्धि को प्रेरित करने वाला कौन?? बाप। *सबके औरक प्रेमक हृदय दिन बंधु रघुनाथ*। सबके हृदय में प्रेरणा देने वाला संगमयूग में प्रेरणा देने वाला कौन होता है?? एक ही बाप है जो बापो का बाप होता है। उस सबको संभालने वाला है। तो फिर, रचैता हम अपने को माने?? या सबका रचैता एक है??? अहंकार आता है, क्या?? हम संभालेंगे तो संभले रहेंगे, हम नहीं संभालेंगे तो मर जाएंगे। ये अहंकार नहीं है??? अहंकार है!!! ये अहंकार को त्याग देना चाहिए। सब कुछ उसको अर्पण करना चाहिए। लेकिन ये नहीं कहेंगे की बाल बच्चो में हमारा मोह लगा हुआ है, ये कहेंगे हम संभालने वाले है। हम नही संभालेंगे तो कौन संभालेगा?? तो *बाप कहते है ईश्वरीय ज्ञान की जो पढ़ाई है, इस ज्ञान का मुख्य एग्जाम कौनसा है?? नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा। जबसे ज्ञान में आते है , जब से ज्ञान में आकर बाप को पहचानते है। बो फाउंडेशन की बेला है, उस फाउंडेशन की बेला में जिन्होंने इस नष्टोमोहा का जितना गहरा फाउंडेशन डाल लिया, जो आदि सो अंत मे उतना ही ऊंच पद पाएंगे।*
वीसीडी 2398
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