शिव दधीचि हरिचंद नरेशा, सहे धर्म हित, कोटि कलेशा।

 

शिव दधीचि हरिचंद नरेशा, सहे धर्म हित कोटि कलेशा


*इस दुनिया में जो भी धर्म पितायें आए तो समाज की सत्ताधीशों ने, गद्दीनशीनों ने उन धर्म पिताओं का जोर शोर से विरोध करना शुरु कर दिया। धर्म के धक्के खाने के लिए मजबूर कर दिया।*

*बुद्ध को मजबूर किया, मोहम्मद को मजबूर किया, क्राइस्ट को मजबूर किया या नहीं किया??*

               *ये धर्म के धक्के बहुत प्रसिद्ध है। हिस्ट्री में भी प्रसिद्ध हैं, तो शास्त्रों में भी प्रसिद्ध हैं।*

तो जो इस सृष्टि रुपी रंगमंच पर ग्रेट ग्रेट ग्रैंड फादर का पार्ट धारी होगा, सत्य सनातन धर्म का स्थापक होगा, धर्म पिता होगा वो कितने धक्के खाएगा धर्म के??*

            *जो कवियों ने गाए हुए हैं----- "शिव दधीचि हरिचंद नरेशा, सहे धर्म हित, कोटि कलेशा।*

*उन्होंने तो अतिश्योक्ति अलंकार डाल दिया। कोटि- माना करोड़ों दुख सहे।*

*मुसलमान लोग तो आज भी कहते हैं ।उनकी कुरान में भी लिखा है-- जब कयामत होगी तो खुदा के बंदे बड़े आराम से रहेंगे। तो क्या,जो भगवान का बच्चा प्रैक्टिकल में सत्य धर्म की स्थापना करेगा और सच्चा साबित होगा संसार में, एकमात्र भगवान का बच्चा सद्गुरु के रूप में क्योंकि सद्गुरु साकार होता है। वो साकार सद्गुरु ऊंच ते ऊँच भगवंत का बच्चा, बापों के बाप का बच्चा, धर्म की स्थापना के कार्य में दुखी होगा मन बुद्धि के द्वारा या मन बुद्धि के संकल्पों में प्रसन्न रहेगा?*


वीसीडी 2391






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