धारणा शक्ति कैसी हो?

 *धारणा शक्ति कैसी हो?*


 जिस सत्य को धारण करने वाली सती कही गई,  वह सत्य धारण करने वाला, सत्य माना ज्ञान। *वह सत् धारण करने वाला पहले पहले पुरूष बुद्धि में धारण करने वाला, प्रैक्टिकल कर्मेंद्रियो में नही बताया, ज्ञान पहले बुद्धि में धारण होगा या कर्मेंद्रियों में धारण होगा पहले? तो पहले पहले बुद्धि में धारण करने वाला पुरुष, या स्त्री? पुरुष।* 


जो *पुरुष सत्य को बुद्धिरूपी योनि में धारण करता है बुद्धि रूपी पेट में धारण करता है, वह पुरुष ही भगवान के रूप में पूजा जाता है*। सत्य उस पुरुष में है। पुरुष से स्त्री में आता है,  वह है सूक्ष्म सत ज्ञान का सत। क्या है? ज्ञान का सत है। ऐसे ही पुरुषों में स्थूल सत भी है। हरेक पुरुष रूपी बाप में वह सत्य है। 


उस सत्य से यह सृष्टी उत्पन्न होती है, *जिस सत को अगर माता सही रुप मे धारण करें अव्यभिचारी रूप से, तो वह माता सती कही जाती है।* माताओ में सब से जास्ती पावरफुल कही जाती है। इसीलिए कहा जाता है घर की स्त्री अगर अच्छी हो तो घर स्वर्ग बन जाता है। और घर की स्त्री अगर व्यभिचारिणी है, तो घर नरक बन जाता है। तो सत को धारण करने वाली सति। 


वह पार्वती ने बेहद का सत ज्ञान का धारण किया था शंकर जी ने, त्रिनेत्री से। और *पुरूष जो है, संसार मे वह सत धारण करने वाले है, जिसे वीर्य कहा जाता है, जिस वीर्य की शक्ति को अगर कोई माताए ऐसी निकले  जो जीवन भर उस वीर्य की एक भाव से रक्षा करें, मेरा तो एक दूसरा न कोई। तो वो परिवार, वह जो सृष्टि बनेगी, वह शिवालय की सृष्टि बनेगी, वह परिवार जीवन भर बंधा हुआ रहेगा, परिवार में कभी झगड़ा नही हो सकता सती की पैदाइश में। तो वह 2 सत हुआ। एक स्थूल सत दूसरा सूक्ष्म सत ज्ञान का सत।* *(time @2.58.58-3.4.37) vcd 2342*

Comments