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ब्राह्मण का धर्म नहीं है भीख मांगना। यह भगवान का डायरेक्शन है।*

🏹*ब्राह्मण का धर्म नहीं है भीख मांगना। यह भगवान का डायरेक्शन है।* 🏹*भीख नहीं मांगना है। इशारे से भी नहीं मांगना है, वाचा से भी नहीं मांगना है, कोई भी प्रकार से नहीं मांगना -- जैसे चंदा मांगते हैं, हम तो अपने लिए नहीं मांग रहे हैं, हम तो विश्व कल्याण के लिए मांग रहे हैं थोड़ा थोड़ा, थोड़ा दो। तो मांगना है या नहीं है? मांगना है??!!!* 🏹*कोई भी प्रकार से न मांगना--- सहयोग की भी भीख नहीं मांगना। ना तन का सहयोग की भीख मांगना, न मन का सहयोग की भीख मांगना, ना धन की सहयोग का भीख मांगना, ना दृष्टि की सहयोग का भीख मांगना, अरे कृपा दृष्टि दे दो न, यह दृष्टि का भीख मांगना हुआ न*। VARTA 905

क्या दुनिया हमारे जन्मों के बारे में जानेगी??

जिज्ञासु - आगे पीछे के जन्म तो दुनिया हमारी देखेगी नहीं??  बाबा - अरे! * हर सितारे की एक ही दुनिया है या अलग अलग दुनिया है?? अलग अलग दुनिया है। किसी की छोटी दुनिया, किसी की बड़ी दुनिया। अनेक जन्म है। अनेक जन्मों में संबंध - संपर्क - संसर्ग में आने वाली जितने भी आत्माएं है, बो ही तो हमारी दुनिया है। तो हमारे संसर्ग - संपर्क में आने वाली आत्माएं हमारे बारे में जानेगी कि नहीं जानेगी?? बो तो जरूर जानेगी। दूसरी आत्माओं के संसर्ग संपर्क में आने वाले जाने, या ना जाने *। तो यह बात रॉन्ग है कि आगे पीछे की जन्म तो दुनिया हमारी देखेगी नहीं। ऐसा होगा? हमारे से कनेक्टेड जो हमारी दुनिया होगी वह जरूर देखेगी। संगम पर सारी दुनिया होती है। और ना ही हम आगे पीछे के जन्म क्लियर खुद बोल सकते हैं, नहीं बोल सकते। लेकिन *आगे चलकर अपने मुंह से अपने पार्ट को क्लियर करेंगे।*  Varta 929 @20min.

भारत वासी श्रेष्ठ आत्माओं की निशानी:-

* भारत वासियों के लिए खास बोला है समर्थन होने में हृदय विदिर्ण होता है। क्या? बहत सोच समझके फिर समर्पण होते है। और विदेशी फॉरेन हो जाते। ये फर्क पड़ जाता है। कोई काम करें तो सोच समझ कर करना अच्छा है या फौरन करना अच्छा? कोई भी काम सोच समझ कर करना अच्छा है। कदम उठाए तो सोच समझकर उठाएं और अगर एक बार कदम उठा लिया तो फिर पीछे नहीं हटना। यहां श्रेष्ठ आत्माओं की निशानी है -- या तो कोई काम करेंगे नहीं और अगर करेंगे तो पूरा कर के छोडेंगे। संबंध जोड़ेंगे तो जीवन भर निभाकर फिर छोड़ेंगे, नहीं तो छोड़ेंगे नहीं।* Varta 929 @44 min.

सहज राजयोग क्या है??

 ★ _*उनको तो मालूम ही नही है सहज राजयोग क्या है?,वो अनुभव ही नही कर पा रहे है। जिस सहज राजयोग में इंद्रिया निश्चल हो जाएगी।और जब इंद्रिया निश्चल होगी, तो इंद्रियों में डिसचार्ज होगा?? नही होगा। जो सबसे ज्यास्ती चंचल इंद्रिया है ना कर्मेन्द्रियों में, वो कौनसी है?(कामइन्द्रिय) हाँ, तो कमेंद्रियों से जब काम भोगना शुरु करते हैं ना पुरुष रूप दुर्योधन दुशासन, तो वो इंद्रियों को स्थिर कर देंगे? भोग में रहे लेकिन भोग मे रहते हुए भी स्थिर हो जाए। की चंचलता किए बिगर रह नही सकते? क्या होता है? अरे इंद्रिया चंचल होती है या नही भोग की इंद्रियों के साथ? पुरुष इन्द्रिय और स्त्री इंद्रिय एक दूसरे के साथ भोग भोगते है ना, एक दूसरे के इंद्रियों से, तो जो भोग भोगते है, उसमे निश्चल हो पाते है? नही हो पाते है। ऐसे निश्चल हो जाए की उस समय कोई फोन आजाए जरूरी, तो वो उस स्टेज में फोन भी अटेंड करते रहे। क्या? बात भी कर ले पूरी 5-10 मिनट जो करनी हो, और फोन उठा के रख दे। तो सहज राजयोगी हुए की कठिन राजयोगी हुए? क्या कहेंगे? तो वो तो जानते ही नही है कुछ भी। कौन? (सन्यासी ) उनको तो मालूम ही नही है। मालूम कब? जब...

जब पोल पट्टी खुलेगी तब बुद्धि से सारा ज्ञान उर जायेगा।

 _*यहां जो एटामिक आत्मिक बॉम्ब बना रहे हैं, ऐसी ऐसी आत्माओं की ग्लानि भर रहे हैं, कि वह सूंग ने से ही कोई का ज्ञान खल्लास हो जावे। ज्ञान ही छोड़ देंगे। कहेंगे अरे! इन आत्मा को तो हम बहुत ऊंची आत्मा समझते थे, अरे इनकी यह पोल पट्टी निकली। बस ज्ञान उनका सारा उड़ जावेगा।*_ _*★ पुरानी दुनिया को आग जरूर लगनी है। वह लोग भी उन्नति करते जाते हैं। एटॉमिक बॉम्ब कोई दिन उनके बिकेंगे जरूर। एक दो को एटॉमिक बॉम्ब देने का मदद करते रहते हैं। यहां कौन सी एटॉमिक बॉम्ब है? हाँ, उनके है एटॉमिक बॉम्ब। और हमारे हैं आत्मिक बॉम्ब। क्या? एटम और आत्मा। उन बॉम्ब में ऐसा मसाला भरते हैं, की सूंघने से ही आदमी खत्म हो जावेगा। यहां जो एटमिक आत्मिक बॉम्ब बना रहे हैं, ऐसी ऐसी आत्माओं की ग्लानि भर रहे हैं, कि वह सूंग ने से ही कोई का ज्ञान खल्लास हो जावे। ज्ञान ही छोड़ देंगे। कहेंगे अरे! इन आत्मा को तो हम बहुत ऊंची आत्मा समझते थे, अरे इनकी यह पोल पट्टी निकली। बस ज्ञान उनका सारा उड़ जावेगा। बाप कहते हैं बड़े ते बड़ा बॉम्ब कौन सा है? बड़े से बड़ा बॉम्ब है? परमात्मा बॉम्ब। वह परमात्मा बॉम्ब भी फटा नहीं है। वह परमात्मा बॉ...

स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ

 *स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ* *तुम सूर्यवंशी बच्चों की स्टूडेंट लाइफ सबसे ऊंची है, और धर्म वालों के मुकाबले। क्योंकि तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट है-- नर से सीधे एकदम नारायण बनना, प्रिंस नहीं* बच्चों को तो बड़ा नशा होना चाहिए, इसीलिए तुम बच्चों की गाई जाती है ना, क्या?? *स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ।बहुत अच्छी लाइफ। क्यों?? तुम तो सूर्यवंशी बच्चे हो। आदि से लेकर अंत तक पूरी पढ़ाई पढ़ते हो ना। तो बहुत नशा होना चाहिए। इसलिए गाया जाता है ना-- स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ।* बस यही स्टूडेंट लाइफ जो गाई जाती है ना, अंग्रेजी में, इज द बेस्ट लाइफ, तो *किसके स्टूडेंट की लाइफ??*  *ऐरा गैरा नत्थू खैरा तो ढेर सारी टीचर्स हुए हैं दुनिया में, तो उन सबके स्टूडेंट की लाइफ?? नहीं, सुप्रीम सोल शिव बाबा, जिनको कहा जाता है।*             तो शिव बाबा कहें, तो उसमें भी प्रजापिता ऐड हो गया। *तो दोनों में एकदम पढ़ाने वाला कौन है? शिव और बाबा के बीच में पढ़ाई कौन पढ़ाता है? बाबा या शिव?*            शिव पढ़ाई पढ़ाता है? और पढ़ता कौन है? बाबा ही पढ...

ये शरीर तब तक अपना पार्ट बजाते हैं जब तक इनमें परमपिता परमात्मा की दी हुई ऊर्जा(आत्मा) है।

 *जैसे वो दुनियावी इंस्ट्रूमेंट काम तब ही करते हैं, जब उसमें पावर(ऊर्जा) आएगी कहीं से। ऐसे ही ये शरीर तब तक अपना पार्ट बजाते हैं जब तक इनमें परमपिता परमात्मा की दी हुई ऊर्जा(आत्मा) है।* *जैसे वो इंस्ट्रूमेंट होते हैं- रेडियो है, टीवी है, टेप रिकॉर्डर है, अब उसमें यंत्र तो सारे हैं पर क्या सदा वो अपना काम करता है?? कब काम करता है? कब नहीं करता है?*  *उसमें पावर आएगी कहीं से तो काम करेगा ,नहीं आएगी तो नहीं करेगा। ऐसे ही है। ये आत्मा पावर है।*  *और पावर कहां से आती है? जैसे वह रेडियो में, टीवी में, पावर कहां से आती है? जनरेटर से आती है।*  *तो यह जो दुनिया में जनरेशन चल रही है, ये जनरेशन कैसे चलती है? आजकल वैज्ञानिकों ने तो रोबोट बनाए हैं। वह भी अपने आप चलते हैं क्या? बिना ऊर्जा के चलते हैं?*  *ऐसे ही यह शरीर भी है। इसमें जो ऊर्जा है परमपिता परमात्मा की दी हुई ,तब तक ये शरीर अपना अपना पार्ट बजाते हैं और ऊर्जा गई तो पार्ट खत्म।* 16-12-18(54मि)2732 *संगम युग में ब्राह्मणों को ऊर्जा कहां से आती है??* *84 जन्मों में ऊर्जा कहां से मिलती है?* *मनुष्य ये बात भूल गए हैं, वो...

पुरुष जिसको कांटा लगाते है, उसको भी आप समान कांटा बनाते।

 *मोस्ट इंपोर्टेंट प्वाइंट* - *पुरुष जिसको कांटा लगाते है, उसको भी आप समान कांटा बनाते। महाकाली और महाकाल में कौन बड़ा कांटा दुनिया के लिए बन जाती? महाकाली_* ★ _तो बताया, जो भी *इस दुनिया में पुरुष मात्र है वह तो सब कांटे है ही, लेकिन जिसको कांटा लगाते हैं उसको भी आप समझ सके रंग से कांटा ही बनाते हैं। तो 2 चाहिए ना। क्या? कांटा लगाने वाला भी चाहिए, और शुरू शुरू में कांटा सहन करने वाला भी चाहिए और बाद में वह भी कांटा। वो और बड़ा कांटा। क्या? क्या कहा? पुरुषों से भी बड़ा कांटा। कैसा काटा? जैसे महाकाल और महाकाली है, महाकाल क्या है? महाकाल पुरुष है कि नहीं? महाकाल तो पुरुष हैं। और महाकाली स्त्री है। बड़ा कांटा कौन बनता है? कौन से आत्मा दोनों के बीच में बड़ा कांटा दुनिया के लिए बन जाता है?? एक अक्षर लिखो, काली नही, महाकाली। कालिया तो बहुत होती है। हाँ, उस से महान बड़ी काली कोई नही। तो महाकाली सबसे बड़ा कांटा इस दुनिया के लिए हो जाती है। होती है कि नही? तो कांटे होते ही हैं ऐसे। कैसे? दुखदाई। जहाँ से ये ऐसे... पहले मोटे और उपर मे जाके तीखे पतले महीन काटे। ऐसे काटे होते है और ये जितना बा...

तुम सूर्यवंशी बच्चों की खातिर सब को किल्लत उठानी पड़ती है।

 Most imp- *तुम सूर्यवंशी बच्चों की खातिर सब को किल्लत उठानी पड़ती है,माना बाप के सन्मुख आकर वापस जाना पड़ता है। (और धर्म वालों को)* अभी पुरुषोत्तम संगम युग में सतोप्रधान से तमो प्रधान बनना जरूर है। क्योंकि शूटिंग हो रही है यहां चारों युगों की। देवता वर्ण की आत्माओं की भी शूटिंग हो रही है।वो भी सतो प्रधान से तमोप्रधान बनती हैं, और क्षत्रिय वर्ण की आत्माएं भी सत्व प्रधान से तमो प्रधान बनती हैं। *तो हर युग चार अवस्थाओं से पसार जरूर होता है ।अभी बनना सबको जरूर है।*            *जो भी आते हैं चार अवस्थाओं से पसार जरूर होते रहते हैं। पीछे कभी भी आवें, सतयुग में आवें, त्रेता में आवे, द्वापर की शूटिंग में आवें, या कलयुग की शूटिंग के अंत में आवें, जब भी आएंगे पहले सतो प्रधान पार्ट बजाएंगे और बाद में यज्ञ में तमोप्रधान बनेंगे।*                 तुम्हारे खातिर तो खास बाप आए हैं। *तुम बच्चों की खातिर तो सब को वापस जाना पड़ता है। माना जब तक तुम, जो 100/. परसेंट तमोप्रधान बने हो, जब तक तुम 100/. परसेंट तमोप्रधान से सतो प्र...

बेहद में कम खर्च बालनशीन कैसे बने??

 *कमखर्च बालानशीन कैसे बने??* ★ *कोई भी काम हो, कम-से-कम खर्चे में चलाए लेना चाहिए। व्यर्थ पैसा बर्बाद नहीं करना चाहिए। अपने हाथ में भी जो पूंजी है, वो भी ईश्वर के कार्य के लिए पूंजी है। विश्व कल्याण के लिए है। स्वार्थ के लिए जितना कम खर्च करे उतना जास्ती हमारा नाम बाला होगा। और विश्व कल्याण के लिए जितना जास्ती खर्च करें उतना हमारा नाम बाला होगा। सिर्फ धन की बात नहीं है, ज्ञानधन की भी बात है। ज्ञानधन को भी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। पात्र-सुपात्र का ज्ञान लेकर के, पहचान लेकर के ज्ञान देना चाहिए। समय की भी बात है। आज की दुनिया में समय का सबसे ज्यादा मूल्य है तो कर्मखर्च बालानशीन। अपने आमोद-प्रमोद के लिए, अपने रथ के लिए, अपने रथ से कनेक्टड संबंधियों के लिए कम-से-कम समय लगाना चाहिए। विश्व-कल्याण के लिए ज्यादा-से-ज्यादा समय खर्च करना है और वो भी हिसाब से, बेहिसाब नहीं। संकल्पों में भी कम खर्च बालानशीन। संकल्प बीज होते हैं। बीज की बहुत वैल्यु होती है। अभी संगमयुग में जितना श्रीमत के अनुकूल संकल्प चलाएँगे, उतना हमारा भाग्य बनेगा।* *varta 1368*

_जितना इंडिपेंडेंट निराधार पुरुषार्थ करेंगे, उतना ऊंच पद पाएंगे।

 *_जितना इंडिपेंडेंट निराधार पुरुषार्थ करेंगे, उतना ऊंच पद पाएंगे। और कोई का आधार लेकर के डिपेंडेंट होकर के पुरुषार्थ करेंगे, तो घाटा हो जाएगा।_*  _*★ बच्ची कहा भी तुम रहो, तो वहां रहकर के भी तुम ऊंच ते ऊंच पद पाए सकते हो। क्योंकि जितना तुम इंडिपेंडेंट मेहनत करेंगे, कोई का आधार नही, निराधार पुरुषार्थ, उतना ही फल पाएंगे। बाकी कोई का आधार लेकर के डिपेंडेंट होकर के पुरुषार्थ करेंगे, तो उसका हिस्सा उसको मिलेगा की नही? तो तुमको घाटा होगा ना। हाँ! तो मेहनत करनी है। तो ये अपनी मेहनत में लगा ही रहना चाहिए। निराधार बनेंगे तो शरीर छोड़ने के बाद कहि भी जाएंगे तो स्वाधीन रहेंगे की पराधीन रहेंगे? दूसरे का आधार की दरकार रहेगी? नही। तुम यहाँ राजयोग सीखते हो, स्वाधीन बनने की पढ़ाई। ये स्वाधीन होने की बात अपने ऊपर है। मेहनत तुम अपने ऊपर करते हो तो तुम्हारे लिए राज्य तो जरूर चाहिए। समझे ना!  (@18.18-20.37) dt 25.09.2019.*

न स्वर्ग के सुख लेना है ,ना नर्क के। उसे कहेंगे असली वैरागी/संन्यासी ।

 *न स्वर्ग के सुख लेना है ,ना नर्क के। इस दुनिया को भी छोड़ा, इस दुनिया के सुखों को भी और इस दुनिया के दुखों को भी छोड़ा, तो क्या हुए?? बैरागी, सन्यासी* *वो साधु भी ऐसे ही कहते रहते हैं-- ज्ञान भक्ति और वैराग्य। तो झूठ बोलते हैं या सही?? सही बोलते हैं।* पहले ज्ञान की प्रारब्ध स्वर्ग में सुख भोगते हो, फिर भक्ति की प्रारब्ध दुर्गति, दुख भोंगते हो, नीचे गिरते हो।           *फिर जब मैं आता हूं, तो देवताओं के सुख को भी छोड़ो, ज्ञानेंद्रियों का सुख भी नहीं भोगेंगे, और भक्ति में क्या करते हैं? व्यभिचारी सुख भोगते हैं, तो वह सब अनेकों को याद करना, अनेकों से सुख भोगना, अनेकों से इंद्रियों के संबंध भोगना, सब छोड़ो।*        *क्या करो??* *वैराग्य, इन सब से विपरीत राग।*  राग- प्यार, इन सब से प्रीति छोड़ दो। *न स्वर्ग के सुख लेना है, ना नरक के।* कहां जाना है?? शांति धाम में जाना है, तो बैरागी हुए कि नहीं?  *इस दुनिया को भी छोड़ा, इस दुनिया के सुखों को भी, इस दुनिया के दुखों को,तो क्या हुए?? बैरागी, सन्यासी।*         इसीलि...

असली ज्ञान वो, जो प्रैक्टिकल काम करके दिखाएं।

 असली ज्ञान वो, जो प्रैक्टिकल काम करके दिखाएं। प्रैक्टिकल कुछ भी नहीं तो नकली ज्ञान* *ज्ञान ऊंच ते ऊंच बाप से आता है, फिर सागर में जाता है। सागर से फिर धरनी पर आता है। सूर्य कौन? और सागर कौन? धरनी कौन?*  *सूर्य हुआ शिव, सागर हुआ प्रजापिता, धरनी हुई जगदंबा। तो यह 3 आत्माएं हुई। कोई चौथी आत्मा भी तो है, उसके पास नहीं जाता??*  *जाता है, उसके पास ना जाए तो असली ज्ञान जल का स्वरूप बनेगा ही नहीं।*                   *असली ज्ञान जल कैसा?? जो प्रैक्टिकल में काम करके दिखाये, तो असली ज्ञान और प्रैक्टिकल कुछ भी नहीं, सिर्फ बोल बोल करना सुनना सुनाना, समझना समझाना, और परिवर्तन कुछ भी नहीं, तो नकली ज्ञान कहेंगे। तो चौथी आत्मा है--पराप्रकृति* 2748(2-1-19)27 मि)

अष्ट देव की परिपक्व स्टेज..... जिसमे चाहे उसमे प्रवेश करे।।

 जिज्ञासु: बाबा जो अष्ट देव है वह अष्ट दिगपाल अष्ट देव है। वह बाप को अंतिम जन्म में छोड़कर पूर्व जन्म में वह सहयोगी बनते है सूर्यवंशी । वह अष्ट रतन से भी श्रेष्ठ है ना। बाबा: उनसे ज्यादा श्रेष्ठ है। क्यों? रतन जो होते हैं वह एक दूसरे से कम कीमत वाले होते हैं और जो सूर्यवंशी अष्ट देव है वह सिर्फ सूर्यवंशी है। सब हीरे हीरे हैं। कोई भी माणिक नहीं है, मोती नहीं है, पन्ना नहीं है, मूंगा नहीं है। जिज्ञासु: तो अष्ट रतन से भी श्रेष्ठ है वो ? बाबा: हां। वो सदैव सूर्यवंशी के पार्ट बजाने वाले और वो.. वो बीच में द्वापर युग से ही दूसरे धर्म में कन्वर्ट हो जाएंगे जिज्ञासु: लेकिन अष्ट रतन की ही क्यों गायन है अष्ट देव की क्यों नहीं है? बाबा:,अष्ट रतन बनेंगे ही तब जब उनमें वह देव प्रवेश करेंगे। जिज्ञासु: वह अष्ट देव? बाबा: हां जी। वह अष्ट देव जब तक प्रवेश करके उनके द्वारा श्रेष्ठ पार्ट नहीं बजाएंगे तब तक वह अष्ट रत्नों की गिनती में ही नहीं आएंगे। जिज्ञासु: माना उनका भी वह गायन है? बाबा: अष्ट देव है आत्मा तो अष्ट रतन है जैसे उनका शरीर । और? जिज्ञासु: तो वास्तविक अष्ट रतन का गायन वह सूर्यवंशी ही है। ...

मक्खन चुराना, मटकी फोड़ ना, यह किसका काम था?

 *मक्खन चुराना, मटकी फोड़ ना, यह किसका काम था?  प्रजापिता का काम था। लेकिन नाम रख दिया ब्रह्माकुमारीओ ने ब्रह्मा बाबा का। जो गीता किताब लिखी है, अद्भुत जीवन काहिनी। उस अद्भुत जीवन काहिनी में किसका नाम डाल दिया? ब्रह्मा बाबा का नाम डाल दिया। प्रजापिता को उड़ा दिया। बाबा ही मुरली में कहते है त्रिमूर्ति का चित्र बनाते है। उस त्रिमूर्ति की चित्र में त्रिमूर्ति शिव की लाश भी गुम कर दी। उसका नाम निशान गुम कर दिया। तो वास्तव में वह कृष्ण कहो या भगवान कहो वह सतयुग का कृष्ण नही है, बच्चे रूप में जन्म लेने वाला। वह कौन सा कृष्ण है? संगमयुगी कृष्ण है।*   *Varta 1809*

फाल्गुन कौन है??

 *फाल्गुन कौन है:-* वर्ष की शुरुआत चेत्र मास से होती हैं,उसमे कौनसी ऋतु होती है?? वसंत ऋतु। सतयुग को कौनसी ऋतु कहेंगे??सतयुग को वसंत ऋतु व चेत्र मास कहेंगे। और जो कलियुग के अंत में जो संगमयुग आता है पुरुषोत्तम संगमयुग उसको अन्तिम मास कहेंगे, फाल्गुन। क्यो कहेंगे?? जैसे ब्रह्मा का बच्चा ब्राह्मण वैसे फल शब्द से बनता है फाल। जो गुण,कई गुण हो जाते है।सतयुग में कई गुण होते है ?? गुणो का राजा जो सहनशक्ती धारण करने वाली आत्मा है वो सतयुग की जो फ़र्स्ट आत्मा है या पुरुषोत्तम संगमयुग में जो फ़र्स्ट होता है वो है??सतयुग की जो फ़र्स्ट आत्मा हैं,वो है फाल्गुन या जो पुरुषोत्तम संगमयुग की फ़र्स्ट आत्मा हैं वो फाल्गुन??पुरुषोत्तम  संगमयुग की फ़र्स्ट आत्मा हैं वो फाल्गुन। शिवबाबा से ज्यादा गुण किसी में होंगे क्या?? गुणों का सागर शिव बाबा है या शिव बाबा का बच्चा है?? शिव बाबा है। *वार्ता--722*

शिव परमपिता परमात्मा शरीर नहीं बदलते??

 *शिव परमपिता परमात्मा शरीर नहीं बदलते??*  अरे! 36 मे, 47 मे, 76 मे या भविष्य मे आने वाले 40 वर्ष पुरे होने वाले टाइम पर शरीर बदलते है या नहीं बदलते? बदलते है!? अभी तो कहा-- मै घड़ी-घड़ी शरीर तो नहीं बदलते हूँ, तुम बच्चे आत्माए घड़ी घड़ी शरीर बदलते हो। तो *सन 36 मे भी जिस शरीर मे आया, वो शरीर बाद मे लोप हो गया क्या? रहता है या नहीं रहता है?? नहीं रहता!! अच्छा, शरीर एक प्रकार के होते है या दो प्रकार के? जो स्थूल शरीर हम देखते है, यही शरीर है या ये स्थूल शरीर छोड़ने के बाद भी शरीर रहता है? सुक्ष्म शरीर रहता है न, तो मै तो मुकर्रर रथ मे आता हूँ। सुक्ष्म शरीर जो वाईब्रेशन वाला शरीर है, वो तो खलास नहीं होता। भले दूसरे जन्म ले, 84 जन्म ले, सुक्ष्म शरीर तो अपने पूर्वजन्म मे के संस्कार के अनुसार रहता ही है। तो वो सुक्ष्म शरीर धारी आत्मा, वाईब्रेशन के आधार पर उसमे शिवबाप काम करते रहते है। 36 मे भी आए ज्ञान का बीज डाला, जो ज्ञान का बीज डाला वो भी तो एक वाईब्रेशन है। वो वाईब्रेशन का बीज ब्रह्मा के वाणी मे भी है दादा लेखराज की वाणी मे, वो बीज जब बाप प्रत्यक्ष होते है तो विस्तार मे प्रत्यक्ष हो...

आत्माएं परमधाम में कितनी जगह में रहते है??

***आत्माएं परमधाम में कितनी जगह में रहते है??***  ** *जो आत्माएं है वो विंदू विंदू है , विंदू रूपी स्टेज वाले है । जो भी विंदू रूपी स्टेज वाली आत्माएं है , आत्मिक स्थिति वाली है , वो सहद की मक्खियों की तरह इकट्ठी रह सकती है के नहीं ? रह सकती है ।*  *कहते है स्थूल में जगह नहीं चाहिए , दिल में जगह चाहिए ।*  *तो जो भी आत्मिक स्थिति वाले होंगे , जब लास्ट विनाश होगा उस समय वो चाहे माउंट आबू में हो और चाहे पैराडाइज में हो , थोड़े से स्थान में होंगे । और वो स्थान ऐसा सुरक्षित होगा, जितना और दुनियां में कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं होगा । उस वाईब्रेशन में माया के पांच विकार अथवा प्रकृति के पांच तत्व अपना आक्रमण सफल नहीं कर सकेंगे , इतना वाइब्रेशन तीखा होगा ।* *इसलिए बोला मूरली में की आत्माएं परम धाम में कितनी स्थान में रहती होंगी ? जो भी 500 करोड़ आत्माएं है , उनके लिए कितना स्थान चाहिए ? ____ एक (1) फर्लांग । एक फर्लांग ऊंचाई , एक फर्लांग चौड़ाई , एक फर्लांग लंबाई ~~ ऐसी कोई बिल्डिंग तैयार हो सकती या नहीं ? जिस बिल्डिंग में तीन पैर पृथ्वी हो लेटने और वैठने के लिए , जैसे ट्रेन में ...

परिवार

          परिवार की आवश्यकता परिवार पर निश्चय भी आवश्यक है क्योंकि बाप ने आते ही परिवार को पैदा किया। तो जैसे बाप के निश्चय है वैसे परिवार में भी निश्चय आवश्यक है , क्योंकि परिवार है किसका!!! इतना परिवार विश्व में किसका नहीं है। आप जितना परिवार को चेक करो विश्व में, किसका है?? किसी डिवाइन फादर का भी नहीं है। वहा तो फॉलोअर है। परिवार के साथ सेवा में और संबंध में भी रहते हो। परिवार का निश्चय आपका 21 जन्म चलना है। परिवार में आने से पता चलता है की मैं इतने बड़े परिवार में निश्चय बुद्धि होकर चल रहा हु। परिवार में ये ध्यान देना पड़ता है को *परिवार में हरेक के संस्कार भिन्न भिन्न है लेकिन आपकी यादगार माला है। कहा 1 नंबर कहा 108 नंबर।* तो परिवार में चलते चलते एक दूसरे के संस्कारों को समझ एक राज्य, एक धर्म , एक होकर चलना है। हरेक के प्रति शुभ भावना और शुभ कामना की स्थिति पर चलना है। कोई समझे परिवार से हमे क्या है? परिवार नहीं तो बाबा तो है। लेकिन यहां धर्म और राज्य दोनो की स्थापना है। यहां तो आप सबको राज्य भी करना है और इसी जन्म में करना है तो उसमे परिवार की जरूरत होती ह...

धारणा शक्ति कैसी हो?

 *धारणा शक्ति कैसी हो?*  जिस सत्य को धारण करने वाली सती कही गई,  वह सत्य धारण करने वाला, सत्य माना ज्ञान। *वह सत् धारण करने वाला पहले पहले पुरूष बुद्धि में धारण करने वाला, प्रैक्टिकल कर्मेंद्रियो में नही बताया, ज्ञान पहले बुद्धि में धारण होगा या कर्मेंद्रियों में धारण होगा पहले? तो पहले पहले बुद्धि में धारण करने वाला पुरुष, या स्त्री? पुरुष।*  जो *पुरुष सत्य को बुद्धिरूपी योनि में धारण करता है बुद्धि रूपी पेट में धारण करता है, वह पुरुष ही भगवान के रूप में पूजा जाता है*। सत्य उस पुरुष में है। पुरुष से स्त्री में आता है,  वह है सूक्ष्म सत ज्ञान का सत। क्या है? ज्ञान का सत है। ऐसे ही पुरुषों में स्थूल सत भी है। हरेक पुरुष रूपी बाप में वह सत्य है।  उस सत्य से यह सृष्टी उत्पन्न होती है, *जिस सत को अगर माता सही रुप मे धारण करें अव्यभिचारी रूप से, तो वह माता सती कही जाती है।* माताओ में सब से जास्ती पावरफुल कही जाती है। इसीलिए कहा जाता है घर की स्त्री अगर अच्छी हो तो घर स्वर्ग बन जाता है। और घर की स्त्री अगर व्यभिचारिणी है, तो घर नरक बन जाता है। तो सत को धारण करने ...